Oneindia Hindi
नई दिल्ली। दिल्ली के पटियाला हाउस में पेशी के लिए जाते राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति के पूर्व अध्यक्ष पर सुरेश कलमाडी पर चप्पल फेंकने वाला व्यक्ति कलमाडी की 'भ्रष्ट कार्यप्रणाली से नाराज और निराश' था। उसने कलमाडी को अपमानित करने का निर्णय लिया था।
पुलिस के मुताबिक हमलावर मनोज शर्मा अपनी पहचान छुपाने के लिए पहले कपिल ठाकुर के फर्जी नाम का सहारा लिया। वह मध्य प्रदेश के ग्वालियर का रहने वाला है। उसके तीन बच्चे हैं। 42 साल का मनोज पूर्वी दिल्ली के गीता कॉलोनी में अपनी मां और छोटे भाई से मिलने एक सप्ताह पहले दिल्ली आया था। कलमाडी जब अदालत परिसर की ओर आ रहे थे तब शर्मा ने पुलिस घेरे को तोड़ने की कोशिश की लेकिन जब वह इसमें सफल नहीं हो सका तब उसने उन पर चप्पल फेंक दी।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, "यह जानकारी होने पर कि कलमाडी को पटियाला हाउस अदालत में पेशी के लिए लाया जा रहा है वह अपने को रोक नहीं सका और उन पर हमला करने के लिए अदालत चला आया। उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है। उसे हिरासत में लेकर तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन ले जाया गया और वहां उससे पूछताछ की गई। पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया।"
उन्होंने बताया, "शर्मा पहले ग्वालियर में वकील था। वहां उसने एक उप प्रभागीय मजिस्ट्रेट पर चाकू से हमला किया था जिसके बाद ग्वालियर बॉर काउंसिल ने उसका लाइसेंस रद्द कर दिया।" शर्मा वर्तमान में ग्वालियर से निकलने वाली एक साप्ताहिक पत्रिका 'संसद गर्जन' के लिए काम करता है।
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कलमाडी को खेलों के दौरान ठेकों के आवंटन में कथित धांधली के आरोप में सोमवार को गिरफ्तार किया। सोमवार की रात सीबीआई की हिरासत में बिताने के बाद कलमाडी को मंगलवार को पटियाला हाउस अदालत में पेश किया गया।
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Wednesday, April 27, 2011
एयर इंडिया ने पायलट यूनियन की मान्यता रद्द की, 20 उड़ानें रद्द
आज तक
एयर इंडिया प्रबंधन ने इंडियन कमर्शियल पायलट एसोसिएशन की मान्यता रद्द कर दी और उनके हड़ताल के आह्वान को अवैध घोषित कर दिया.
इस बीच, इंडियन कमर्शियल पायलट एसोसिएशन (आईसीपीए) से संबद्ध पायलटों के हड़ताल पर चले जाने के कारण करीब 20 उड़ानें रद्द हो गयीं. इसमें 8 उड़ानें दिल्ली से जबकि 11 उड़ानें मुंबई से रद्द हुईं.
एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हमने आईसीपीए की मान्यता रद्द कर दी है. उन्होंने जो हड़ताल की है वह अवैध है और उन्होंने अदालत की अवमानना की है. हम जल्दी ही अदालत जा सकते हैं.
आईसीपीए के दिल्ली और मुंबई स्थित कार्यालय को बुधवार सुबह सील कर दिया गया.
एयर इंडिया प्रबंधन ने इंडियन कमर्शियल पायलट एसोसिएशन की मान्यता रद्द कर दी और उनके हड़ताल के आह्वान को अवैध घोषित कर दिया.
इस बीच, इंडियन कमर्शियल पायलट एसोसिएशन (आईसीपीए) से संबद्ध पायलटों के हड़ताल पर चले जाने के कारण करीब 20 उड़ानें रद्द हो गयीं. इसमें 8 उड़ानें दिल्ली से जबकि 11 उड़ानें मुंबई से रद्द हुईं.
एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हमने आईसीपीए की मान्यता रद्द कर दी है. उन्होंने जो हड़ताल की है वह अवैध है और उन्होंने अदालत की अवमानना की है. हम जल्दी ही अदालत जा सकते हैं.
आईसीपीए के दिल्ली और मुंबई स्थित कार्यालय को बुधवार सुबह सील कर दिया गया.
सत्य साईं बाबा को दी गई महासमाधि
एनडीटीवी इंडिया
सत्य साईं बाबा का बुधवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। 9 पवित्र नदियों के पानी के छींटों और मंत्रोच्चार के साथ उन्हें समाधि दी गई। इस दौरान सर्वधर्म प्रार्थना भी आयोजित हुई। अनुयायी मानते हैं कि सत्य साईं बाबा को सिद्धि प्राप्त थी, इसलिए चारों वेदों के मंत्रों के जाप के साथ-साथ गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, कावेरी जैसी 9 पवित्र नदियों के जल का इस्तेमाल किया गया।
यही नहीं 9 ग्रहों के प्रतीक 9 बेशकीमती पत्थरों से सजाकर 9 तरह का अनाज उनकी समाधि में रखा गया। कुलवंत हॉल के तीन गुंबदों में से तीसरे गुंबद के ठीक नीचे जहां सत्य साईं बाबा प्रवचन किया करते थे, वहीं उनकी समाधि बनाई गई है।
आश्रम के अंदर जैसे ही अंतिम संस्कार शुरू हुआ, प्रशांति निलयम के बाहर पुलिस कर्मियों ने बाबा को बंदूकों की सलामी दी। बाबा के भतीजे आरजे रत्नाकर ने पार्थिव शरीर पर पवित्र जल छिड़कने जैसी परम्पराएं पूरी की।
वैदिक पंडितों द्वारा अंतिम विधि संपन्न किए जाने के बाद सुबह करीब पौने 10 बजे लाल पर्दे डाल दिए गए और प्रशांति निलयम के साईं कुलवंत हॉल में उसी स्थान पर समाधि की प्रक्रिया शुरू की गई, जहां से सत्य साईं सालों से अपने भक्तों को उपदेश देते आ रहे थे। समाधि देने की प्रक्रिया करीब 25 मिनट तक चली।
जिस स्थान पर सत्य साईं को समाधि दी गई है, वहां उनका स्मारक बनाया जा सकता है। केवल 14 साल की उम्र में स्वयं को शिरडी साईं बाबा का अवतार घोषित करने वाले साई बाबा ने जहां अपने चाहने वालों को अनेक तरह के चमत्कार दिखाए, वहीं उनके द्वारा संचालित ट्रस्ट ने अनेक स्कूलों, अस्पतालों आदि की स्थापना की और उनके नाम से कई विकास और परोपकार के कार्य किए जा रहे हैं।
सत्य साईं बाबा ने गत रविवार को सुबह के समय अपनी देह त्यागी। इससे पहले वह करीब एक माह से अस्वस्थ थे और उनके शरीर के प्रमुख अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। बाबा को 28 मार्च को हृदय और श्वसन संबंधी समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिछले दो दिन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, अनेक दलों के नेताओं, कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के अलावा क्रिकेट, उद्योग जगत और विविध क्षेत्र के प्रतिष्ठित लोगों और आम जनता ने पुट्टपर्थी में बाबा के अंतिम दर्शन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
माना जा रहा है कि देश और विदेश के करीब पांच लाख लोग अपने आध्यात्मिक गुरु के अंतिम दर्शन के लिए पुट्टपर्थी पहुंचे। अंतिम संस्कार की विधि के बाद डाले गए पर्दों को 40 मिनट बाद हटा दिया गया और मौजूद लोगों ने सत्य साईं की समाधि के दर्शन किए। इससे पहले 9 बजने से कुछ समय पूर्व ही कांच के उस पात्र को हटा लिया गया, जिसमें सत्य साईं की पार्थिव देह रविवार रात से अंतिम दर्शन के लिए रखी हुई थी। इसके बाद बाबा के पार्थिव शरीर को कुछ समय के लिए तिरंगे में लपेटा गया।
आंध्र प्रदेश सशस्त्र पुलिस के जवानों ने सत्य साईं की अंतिम विदाई के मौके पर सम्मान में हवा में 21 गोलियां चलाईं। इसके बाद तिरंगे को हटा लिया गया और हिन्दू, ईसाई, मुस्लिम, सिख, यहूदी व बौद्ध धर्म के धर्मगुरुओं व संतों ने अपने-अपने धर्मग्रंथों के मंत्रों, छंदों का पाठन किया। इसके बाद उन्होंने समाधि स्थल पर विभूति छिड़की और मंगल आरती की गई। साईं बाबा की पार्थिव देह उनके पसंदीदा भगवा रंग के परिधान में लिपटी थी और भतीजे रत्नाकर ने अंतिम संस्कार संपन्न कराया। वैदिक मंत्रोच्चार के समय रत्नाकर अपने आंसू नहीं रोक सके और रो पड़े।
रत्नाकर 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति वाले सत्य साईं केंद्रीय ट्रस्ट के सदस्य हैं और माना जा रहा है कि वह इस ट्रस्ट के प्रमुख पद के दावेदार हैं। साईं बाबा के अंतिम संस्कार के समय उनके पार्थिव शरीर पर पवित्र नदियों के जल के साथ ही गौ-मूत्र छिड़का गया। विधि संपन्न कराने वाले पुजारियों को गोदान के साथ शहद, घी और रेशम का दान किया गया। अंतिम संस्कार के बाद हॉल में मौजूद लोग समाधि के दर्शन के लिए उमड़ पड़े।
अंतिम संस्कार में बाबा के पारिवारिक सदस्यों, सत्य साईं केंद्रीय न्यास के सदस्यों व अधिकारियों, बाबा के करीबी शिष्यों और विशिष्ट व्यक्तियों सहित केवल 600 लोगों ने हिस्सा लिया।
इसके पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, पंजाब के राज्यपाल शिवराज पाटिल, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा, आंध्र प्रदेश के राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन, मुख्यमंत्री एन किरण कुमार रेड्डी, पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और आंध्र प्रदेश व कर्नाटक के कई मंत्रियों ने बाबा को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने मंगलवार मध्य रात्रि तक बाबा का अंतिम दर्शन किया। साईं बाबा (85) का रविवार को निधन हो गया था।
सत्य साईं बाबा का बुधवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। 9 पवित्र नदियों के पानी के छींटों और मंत्रोच्चार के साथ उन्हें समाधि दी गई। इस दौरान सर्वधर्म प्रार्थना भी आयोजित हुई। अनुयायी मानते हैं कि सत्य साईं बाबा को सिद्धि प्राप्त थी, इसलिए चारों वेदों के मंत्रों के जाप के साथ-साथ गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, कावेरी जैसी 9 पवित्र नदियों के जल का इस्तेमाल किया गया।
यही नहीं 9 ग्रहों के प्रतीक 9 बेशकीमती पत्थरों से सजाकर 9 तरह का अनाज उनकी समाधि में रखा गया। कुलवंत हॉल के तीन गुंबदों में से तीसरे गुंबद के ठीक नीचे जहां सत्य साईं बाबा प्रवचन किया करते थे, वहीं उनकी समाधि बनाई गई है।
आश्रम के अंदर जैसे ही अंतिम संस्कार शुरू हुआ, प्रशांति निलयम के बाहर पुलिस कर्मियों ने बाबा को बंदूकों की सलामी दी। बाबा के भतीजे आरजे रत्नाकर ने पार्थिव शरीर पर पवित्र जल छिड़कने जैसी परम्पराएं पूरी की।
वैदिक पंडितों द्वारा अंतिम विधि संपन्न किए जाने के बाद सुबह करीब पौने 10 बजे लाल पर्दे डाल दिए गए और प्रशांति निलयम के साईं कुलवंत हॉल में उसी स्थान पर समाधि की प्रक्रिया शुरू की गई, जहां से सत्य साईं सालों से अपने भक्तों को उपदेश देते आ रहे थे। समाधि देने की प्रक्रिया करीब 25 मिनट तक चली।
जिस स्थान पर सत्य साईं को समाधि दी गई है, वहां उनका स्मारक बनाया जा सकता है। केवल 14 साल की उम्र में स्वयं को शिरडी साईं बाबा का अवतार घोषित करने वाले साई बाबा ने जहां अपने चाहने वालों को अनेक तरह के चमत्कार दिखाए, वहीं उनके द्वारा संचालित ट्रस्ट ने अनेक स्कूलों, अस्पतालों आदि की स्थापना की और उनके नाम से कई विकास और परोपकार के कार्य किए जा रहे हैं।
सत्य साईं बाबा ने गत रविवार को सुबह के समय अपनी देह त्यागी। इससे पहले वह करीब एक माह से अस्वस्थ थे और उनके शरीर के प्रमुख अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। बाबा को 28 मार्च को हृदय और श्वसन संबंधी समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिछले दो दिन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, अनेक दलों के नेताओं, कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के अलावा क्रिकेट, उद्योग जगत और विविध क्षेत्र के प्रतिष्ठित लोगों और आम जनता ने पुट्टपर्थी में बाबा के अंतिम दर्शन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
माना जा रहा है कि देश और विदेश के करीब पांच लाख लोग अपने आध्यात्मिक गुरु के अंतिम दर्शन के लिए पुट्टपर्थी पहुंचे। अंतिम संस्कार की विधि के बाद डाले गए पर्दों को 40 मिनट बाद हटा दिया गया और मौजूद लोगों ने सत्य साईं की समाधि के दर्शन किए। इससे पहले 9 बजने से कुछ समय पूर्व ही कांच के उस पात्र को हटा लिया गया, जिसमें सत्य साईं की पार्थिव देह रविवार रात से अंतिम दर्शन के लिए रखी हुई थी। इसके बाद बाबा के पार्थिव शरीर को कुछ समय के लिए तिरंगे में लपेटा गया।
आंध्र प्रदेश सशस्त्र पुलिस के जवानों ने सत्य साईं की अंतिम विदाई के मौके पर सम्मान में हवा में 21 गोलियां चलाईं। इसके बाद तिरंगे को हटा लिया गया और हिन्दू, ईसाई, मुस्लिम, सिख, यहूदी व बौद्ध धर्म के धर्मगुरुओं व संतों ने अपने-अपने धर्मग्रंथों के मंत्रों, छंदों का पाठन किया। इसके बाद उन्होंने समाधि स्थल पर विभूति छिड़की और मंगल आरती की गई। साईं बाबा की पार्थिव देह उनके पसंदीदा भगवा रंग के परिधान में लिपटी थी और भतीजे रत्नाकर ने अंतिम संस्कार संपन्न कराया। वैदिक मंत्रोच्चार के समय रत्नाकर अपने आंसू नहीं रोक सके और रो पड़े।
रत्नाकर 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति वाले सत्य साईं केंद्रीय ट्रस्ट के सदस्य हैं और माना जा रहा है कि वह इस ट्रस्ट के प्रमुख पद के दावेदार हैं। साईं बाबा के अंतिम संस्कार के समय उनके पार्थिव शरीर पर पवित्र नदियों के जल के साथ ही गौ-मूत्र छिड़का गया। विधि संपन्न कराने वाले पुजारियों को गोदान के साथ शहद, घी और रेशम का दान किया गया। अंतिम संस्कार के बाद हॉल में मौजूद लोग समाधि के दर्शन के लिए उमड़ पड़े।
अंतिम संस्कार में बाबा के पारिवारिक सदस्यों, सत्य साईं केंद्रीय न्यास के सदस्यों व अधिकारियों, बाबा के करीबी शिष्यों और विशिष्ट व्यक्तियों सहित केवल 600 लोगों ने हिस्सा लिया।
इसके पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, पंजाब के राज्यपाल शिवराज पाटिल, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा, आंध्र प्रदेश के राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन, मुख्यमंत्री एन किरण कुमार रेड्डी, पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और आंध्र प्रदेश व कर्नाटक के कई मंत्रियों ने बाबा को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने मंगलवार मध्य रात्रि तक बाबा का अंतिम दर्शन किया। साईं बाबा (85) का रविवार को निधन हो गया था।
प. बंगाल चुनाव: तीसरे चरण का मतदान शुरू
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में बुधवार सुबह विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण के तहत तीन जिलों की 75 विधानसभा सीटों पर मतदान शुरू हुआ। मतदान केंद्रों पर बड़ी संख्या में पहुंचे मतदाताओं की लम्बी लाइनें देखने को मिलीं।
तीसरे चरण में कोलकाता और पड़ोसी जिलों उत्तरी और दक्षिणी 24 परगना के 14,419,669 मतदाता 479 उम्मीदवारों के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेंगे। इस चरण में भाग्य आजमा रहे अधिकांश उम्मीदवार राजनीति या अन्य क्षेत्रों की जानी-मानी हस्तियां हैं।
प. बंगाल चुनाव: तीसरे चरण का मतदान बुधवार को
शहर और प्रदेश पुलिस नियंत्रण केंद्र का कार्यभार सम्भाल रहे एक अधिकारी ने कहा, "मतदान सुबह सात बजे शुरू हुआ और अब तक यह शांतिपूर्ण रहा है। किसी भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।"
कोलकाता में विधानसभा की 11 सीटें हैं, जबकि उत्तरी 24 परगना में 33 और दक्षिणी 24 परगना में 31 विधानसभा सीटें हैं।
इस चरण में जिन सीटों पर मतदान चल रहा वह प्रमुख विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में यहां के कुल 75 विधानसभा क्षेत्रों में से 66 में तृणमूल कांग्रेस और उसकी गठबंधन सहयोगी पार्टी सोशलिस्ट यूनिटी सेंट्रर ऑफ इंडिया- कम्युनिस्ट को बढ़त मिली थी।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में बुधवार सुबह विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण के तहत तीन जिलों की 75 विधानसभा सीटों पर मतदान शुरू हुआ। मतदान केंद्रों पर बड़ी संख्या में पहुंचे मतदाताओं की लम्बी लाइनें देखने को मिलीं।
तीसरे चरण में कोलकाता और पड़ोसी जिलों उत्तरी और दक्षिणी 24 परगना के 14,419,669 मतदाता 479 उम्मीदवारों के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेंगे। इस चरण में भाग्य आजमा रहे अधिकांश उम्मीदवार राजनीति या अन्य क्षेत्रों की जानी-मानी हस्तियां हैं।
प. बंगाल चुनाव: तीसरे चरण का मतदान बुधवार को
शहर और प्रदेश पुलिस नियंत्रण केंद्र का कार्यभार सम्भाल रहे एक अधिकारी ने कहा, "मतदान सुबह सात बजे शुरू हुआ और अब तक यह शांतिपूर्ण रहा है। किसी भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।"
कोलकाता में विधानसभा की 11 सीटें हैं, जबकि उत्तरी 24 परगना में 33 और दक्षिणी 24 परगना में 31 विधानसभा सीटें हैं।
इस चरण में जिन सीटों पर मतदान चल रहा वह प्रमुख विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में यहां के कुल 75 विधानसभा क्षेत्रों में से 66 में तृणमूल कांग्रेस और उसकी गठबंधन सहयोगी पार्टी सोशलिस्ट यूनिटी सेंट्रर ऑफ इंडिया- कम्युनिस्ट को बढ़त मिली थी।
एयर इंडिया मैनेजमेंट के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग
नवभारत टाइम्स
नई दिल्ली ।। सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया के हड़ताली पायलटों ने कंपनी की अव्यवस्था और घाटे के लिए पूरी तरह मैनेजमेंट को जिम्मेदार ठहराते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से दखल की गुहार लगाई है और मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की है।
हड़ताली पायलटों के संगठन इंडिया कामर्शल पायलट्स एसोसिएशन (आईसीपीए) ने बुधवार सुबह प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वह कंपनी के बेईमान मैनेजमेंट की नियुक्ति की समीक्षा करें ताकि एयरलाइन के पुराने सुनहरे दिन लौट सकें।
पत्र में आईसीपीए के महासचिव कपूर ने कहा कि उनके पास वे सभी मशीनरी और माध्यम मौजूद हैं, जिनके जरिए मैनेजमेंट की कमियों की जांच की जा सके और उन्हें जिम्मेदार ठहरया जा सके। आईसीपीए मांग करती है कि कंपनी से जुड़े घोटालों की जांच सीबीआई अथवा किसी उचित एजेंसी से कराई जाए। आईसीपीए की ओर से के लिए फायदेमंद हवाई मार्गों को छोड़ने और उन्हें दूसरी निजी क्षेत्र अथवा विदेश की कंपनियों को देने के संदर्भ में सीबीआई जांच की मांग की गई है। इंडियन एयरलाइंस और एयर इंडिया की ओर से 111 नए विमानों के ऑर्डर को भी जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है।
पायलटों के इस संगठन का कहना है कि दिल्ली एवं मुंबई में स्थिति कंपनी के कई प्रतिष्ठानों के इस्तेमाल और हैदराबाद के केंद्रीय प्रशिक्षण प्रतिष्ठान के संदर्भ में भी जांच होनी चाहिए, क्योंकि इनकी वजह से कंपनी का रेवेन्यू प्रभावित हुआ है। आईसीपीए ने आरोप लगाया कि कभी देश की गौरव रही एयर इंडिया प्रबंधन की कमियों की वजह से आज गहरे संकट में है। संगठन का कहना है कि विलय से पहले ही एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस क्रमश: 450 करोड़ और 280 रुपये के घाटे में चल रही थीं, लेकिन कंसल्टिंग प्रवाइडर कंपनी की सेवा लेने के बावजूद कंपनी का घाटा 16,000 करोड़ रुपये हो गया। इस कंपनी की सेवा लेने पर 90 करोड़ रुपये का खर्च आया था।
कपूर ने कहा, इंडिया प्रबंधन अक्षम है, जो एयरलाइन के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। मैनेजमेंट की मंशा से लगता है कि उसने नए विमान खरीदने, मशीनरी को अपग्रेड करने, कर्मचारियों के हौसले को पस्त करने की पटकथा योजनाबद्ध तरीके से लिखी है, ताकि इस एयरलाइन को बेच दिया जाए। उन्होंने कहा कि उत्पीड़क और तानाशाही रवैये के कारण कर्मचारियों का हौसला कम हो गया है। मैनेजमेंट के तानाशाही रवैये की वजह से ही आज ज्यादातर कर्मचारी अदालत में हैं और वहां कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। आईसीपीए ने मैनेजमेंट के उस फैसले की जांच की भी मांग की है, जिसमें यात्री विमानों को मालवाहक विमानों में तब्दील करने की बात की गई है। उसका कहना है कि ऐसा करने में करोड़ों का खर्च आएगा और बाद में इसका कोई फायदा नहीं होगा।
नई दिल्ली ।। सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया के हड़ताली पायलटों ने कंपनी की अव्यवस्था और घाटे के लिए पूरी तरह मैनेजमेंट को जिम्मेदार ठहराते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से दखल की गुहार लगाई है और मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की है।
हड़ताली पायलटों के संगठन इंडिया कामर्शल पायलट्स एसोसिएशन (आईसीपीए) ने बुधवार सुबह प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वह कंपनी के बेईमान मैनेजमेंट की नियुक्ति की समीक्षा करें ताकि एयरलाइन के पुराने सुनहरे दिन लौट सकें।
पत्र में आईसीपीए के महासचिव कपूर ने कहा कि उनके पास वे सभी मशीनरी और माध्यम मौजूद हैं, जिनके जरिए मैनेजमेंट की कमियों की जांच की जा सके और उन्हें जिम्मेदार ठहरया जा सके। आईसीपीए मांग करती है कि कंपनी से जुड़े घोटालों की जांच सीबीआई अथवा किसी उचित एजेंसी से कराई जाए। आईसीपीए की ओर से के लिए फायदेमंद हवाई मार्गों को छोड़ने और उन्हें दूसरी निजी क्षेत्र अथवा विदेश की कंपनियों को देने के संदर्भ में सीबीआई जांच की मांग की गई है। इंडियन एयरलाइंस और एयर इंडिया की ओर से 111 नए विमानों के ऑर्डर को भी जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है।
पायलटों के इस संगठन का कहना है कि दिल्ली एवं मुंबई में स्थिति कंपनी के कई प्रतिष्ठानों के इस्तेमाल और हैदराबाद के केंद्रीय प्रशिक्षण प्रतिष्ठान के संदर्भ में भी जांच होनी चाहिए, क्योंकि इनकी वजह से कंपनी का रेवेन्यू प्रभावित हुआ है। आईसीपीए ने आरोप लगाया कि कभी देश की गौरव रही एयर इंडिया प्रबंधन की कमियों की वजह से आज गहरे संकट में है। संगठन का कहना है कि विलय से पहले ही एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस क्रमश: 450 करोड़ और 280 रुपये के घाटे में चल रही थीं, लेकिन कंसल्टिंग प्रवाइडर कंपनी की सेवा लेने के बावजूद कंपनी का घाटा 16,000 करोड़ रुपये हो गया। इस कंपनी की सेवा लेने पर 90 करोड़ रुपये का खर्च आया था।
कपूर ने कहा, इंडिया प्रबंधन अक्षम है, जो एयरलाइन के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। मैनेजमेंट की मंशा से लगता है कि उसने नए विमान खरीदने, मशीनरी को अपग्रेड करने, कर्मचारियों के हौसले को पस्त करने की पटकथा योजनाबद्ध तरीके से लिखी है, ताकि इस एयरलाइन को बेच दिया जाए। उन्होंने कहा कि उत्पीड़क और तानाशाही रवैये के कारण कर्मचारियों का हौसला कम हो गया है। मैनेजमेंट के तानाशाही रवैये की वजह से ही आज ज्यादातर कर्मचारी अदालत में हैं और वहां कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। आईसीपीए ने मैनेजमेंट के उस फैसले की जांच की भी मांग की है, जिसमें यात्री विमानों को मालवाहक विमानों में तब्दील करने की बात की गई है। उसका कहना है कि ऐसा करने में करोड़ों का खर्च आएगा और बाद में इसका कोई फायदा नहीं होगा।
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